कोशिका किसे कहते हैं और कितने प्रकार के होते हैं?

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कोशिका किसे कहते हैं और कितने प्रकार के होते हैं?

कोशिका किसे कहते हैं और कितने प्रकार के होते हैं?:- कोशिकाएँ दो प्रकार की होती हैं। पहली यूकेरियोटिक कोशिकाएँ हैं, जिनमें एक नाभिक होता है, और दूसरी प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ होती हैं, जिनमें एक नाभिक नहीं होता है, लेकिन एक न्यूक्लियॉइड क्षेत्र होता है। प्रोकैरियोट्स एकल-कोशिका वाले जीव हैं, जबकि यूकेरियोट्स एकल-कोशिका वाले या बहुकोशिकीय हो सकते हैं।

प्रश्न 1. कोशिका क्या है? | कोशिका किसे कहते हैं इसकी खोज कैसे हुई?

उत्तर:- कोशिका (Cell) संसार के समस्त जीव छोटी-छोटी कोशिकाओं से मिलकर बने हैं। यह जीवधारियों की रचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। यह अद्धपारगम्य झिल्ली (Semi-Permeable Membrane) से ढंकी रहती है आर इसमें स्वतःजनन की क्षमता होती है।

प्रश्न 2. सूक्ष्मदर्शी का खोज किसने और कब किया था? 

उत्तर:- सूक्ष्मदर्शी के आविष्कार के साथ ही कोशिका की खोज सन् 1665 ई. में सर्वप्रथम रॉबर्ट हक के द्वारा की गयी। सूक्ष्मदर्शी (Microscope) वह यंत्र है, जिसकी सहायता से हम 0.1 मिमी सेमी छोटी वस्तुओं को देख सकते हैं। 

सूक्ष्मदर्शी की सहायता से रॉबर्ट हक ने कॉर्क के एक महीन सेक्सन को देखा। उनको कॉर्क के सेक्शन में मधुमक्खी के छत्ते के समान छोटे-छोटे कोष्ठक दिखाई पड़े। इन्हीं कोष्ठकों को उन्होंने कोशिका (Cell) नाम रखा। 

रॉबर्ट हक ने कॉर्क की मृतकोशिका का भी अध्ययन किया था, जो चारों तरफ से मोटी भित्ति से घिरी हुई थी। रॉबर्ट हुक का यह अध्ययन उनकी पुस्तक 'माइक्रोग्राफिया (Micrographia)' में प्रकाशित हुआ।

प्रश्न 3. कोशिका सिद्धांत के जनक कौन है? | कोशिका सिद्धांत क्या है और किसने दिया?

उत्तर:- कोशिका सिद्धान्त का प्रतिपादन 1838-39 ई. में वनस्पतिशास्त्री एम. जे. श्लाइडेन (M.J. Schleiden) तथा जर्मन के प्राणिशास्त्री थेडर श्वान (Theodor Schwann) ने किया। इनके सिद्धान्त में पाई गई अनेक कमियों को वैज्ञानिकों (रेमाक, जेली, पुरकिंजे तथा वॉन मोहल) द्वारा दूर किया गया तथा कोशिका सिद्धान्त की स्थिति को निम्नांकित प्रकार से बताया गया:-
  1. सभी प्राणियों का शरीर कोशिकाओं का समूह है। 
  2. यह जैविक क्रियाओं या मेटाबोलिक क्रियाओं की इकाई को प्रदर्शित करती है। 
  3. कोशिकाएँ आनुवंशिक इकाई (Hereditary Unit) हैं तथा इनमें आनुवंशिक गुण भी उपस्थित रहते हैं। 
  4. नवीन कोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं से ही बन सकती हैं। 
  5. किसी भी जीव में होने वाली सभी क्रियाएँ उसकी घटक कोशिकाओं में होने वाली विभिन्न जैव-क्रियाओं के कारण ही होती हैं।

प्रश्न 4.  कोशिका सिद्धांत के मुख्य बिंदु क्या है?

उत्तर:- कोशिका सिद्धान्त की स्थिति को निम्नांकित प्रकार से बताया गया:-
  1. सभी प्राणियों का शरीर कोशिकाओं का समूह है। 
  2. यह जैविक क्रियाओं या मेटाबोलिक क्रियाओं की इकाई को प्रदर्शित करती है। 
  3. कोशिकाएँ आनुवंशिक इकाई (Hereditary Unit) हैं तथा इनमें आनुवंशिक गुण भी उपस्थित रहते हैं। 
  4. नवीन कोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं से ही बन सकती हैं। 
  5. किसी भी जीव में होने वाली सभी क्रियाएँ उसकी घटक कोशिकाओं में होने वाली विभिन्न जैव-क्रियाओं के कारण ही होती हैं।

प्रश्न 5. कोशिका की आकृति कितने प्रकार की होती है?

उत्तर:- अधिकांश कोशिकाओं का व्यास 0.1 Micron (1u = 1/ 100 Mm) तथा 1 Mm के बीच होता है। कोशिका-अंगक तथा कोशिकाद्रव्य के घटक बहुत छोटे होने के कारण इन्हें मिलीमाइक्रोन (Mμ), नानोमाइक्रोन (Nμ) या ऐंग्स्ट्रम (Angstrom, Å) में मापा जाता है। 0.1μ से छोटी वस्तुओं को मनुष्य द्वारा नहीं देखा जा सकता। अतः इन्हें देखने के लिए इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Electron Microscope) का प्रयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 6. कोशिका की मुख्य आकृतियाँ क्या हैं?

उत्तर:- कोशिकाओं की आकृतियाँ लम्बी, गोलाकार, चपटी, आयताकार, बहुभुजी आदि सभी प्रकार की होती हैं। साधारणतः इनकी लंबाई, चौड़ाई और मोटाई 10μ-200μ के बीच होती है। (1μ= 10-6 मीटर)।

प्रश्न 7. कोशिका आकार क्या हैं?

उत्तर:- आकार (Size)-कोशिका का आकार 14 से लेकर 1.5 मीटर तक होता है।
जीवाणु (Bacteria) = 0.2μ से 20μ तक 
मनुष्य का अंडा (Human Egg) = 200μ व्यास 
कपास के तन्तु = 55.6 Cm लंबे 
तंत्रिका कोशिकाएँ (Nerve Cells) = 1-1.5 मीटर लंबे 
प्लूरोनिमोनिया (PPLO) = 0.25μ

प्रश्न 8. कोशिका कितने प्रकार की होती है?

उत्तर:- रचना के आधार पर कोशिकाएँ दो प्रकार की होती हैं : 
  1. प्रोकैरियोटिक कोशिका (Procaryotic Cell) और 
  2. यूकैरियोटिक कोशिक (Eucaryotic Cell)

प्रश्न 9. प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर स्पष्ट कीजिये 

उत्तर:- प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर निम्नलिखित है.

 प्रोकैरियोटिक  यूकैरियोटिक
 ये कोशिकाएँ  जीवाणु एवं नील -हरित  शैवालों में पाए जाते है।   ये कोशिकाएँ सभी जन्तुओं एवं पौधों में पायी जाती हैं।
 इनमें वास्तविक केन्द्र का अभाव होता है।  इनमें वास्तविक केन्द्रक होता है।
 ये कोशिकाएँ अर्द्धविकसित होती हैं।  ये कोशिकाएँ अधिक विकसित होती हैं।
 इनमें कोशिका-विभाजन सम्भव नहीं होता है।   इनमें कोशिका-विभाजन सम्भव होता है।
 इनमें श्वसन-तंत्र झिल्ली में होती हैं। इनमें श्वसन-तंत्र माइटोकॉण्ड्रिया में होता है।
 इनमें माइटोकॉण्ड्रिया, लवक तथा न्यूक्लियोलस विकसित नहीं होते हैं।  इनमें माइटोकॉण्ड्रिया, लवक तथा न्यूक्लियोलस विकसित होते हैं।
 इनमें राइबोसोम (Ribosome) 70s अवसाद गुणांक के होते हैं।   इनमें राइबोसोम 80 S अवसाद गुणांक के होते हैं।


प्रश्न 10. कोशिका कितने प्रकार के होते हैं? | मनुष्य के शरीर में कितनी कोशिकाएं होती हैं?

उत्तर:- कोई भी जीव या तो एक कोशिकीय होता है अथवा बहुकोशिकीय। बहुकोशिकीय जीवों की कोशिकाओं की संख्या उनके आकार पर निर्भर करती है। कोशिका के मुख्य भागों के संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित हैं:

प्रश्न 11. कोशिका भित्ति (Cell Wall) क्या है ? | कोशिका भित्ति कितने प्रकार के होते हैं? 

उत्तर:- कोशिकाभित्ति (Cell Wall) सभी पादप-कोशिकाओं में कोशिकाभित्ति कोशिका के चारों ओर निर्जीव पदार्थों की एक परत के रूप में होती है। कोशिकाभित्ति सेल्युलोज (Cellulose) की बनी होती है। जन्तु-कोशिकाओं में इसका अभाव होता है। यह कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) द्वारा सावित होता है। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में कोशिकाभित्ति मोटी होती है। जन्तु-कोशिका में कोशिकाभित्ति नहीं पाई जाती है।

प्रश्न 12. कोशिका झिल्ली क्या है समझाइए? | कोशिका झिल्ली का मुख्य कार्य क्या है? 

उत्तर:- कोशिका झिल्ली या जीवद्रव्यकला (Cell Membrane)-यह प्रत्येक कोशिका का बाहरी आवरण होती है, जो फॉस्फोलिपिड (वसा) और प्रोटीन की बनी होती है। यह अर्द्धपारगम्य झिल्ली है, जिसकी मोटाई 25A से 75A तक होती है (IA ऍग्स्ट्रॉम=10-10 M)। इसका मुख्य कार्य है। विसरण या जल की परासरण (Osmosis) क्रिया या नियंत्रण, ATP बनाने एवं इलेक्ट्रॉन के आवागमन हेतु माध्यम का कार्य करना है।

प्रश्न 13. जीवद्रव्य से आप क्या समझते है? | जीवद्रव्य के खोजकर्ता कौन है?

उत्तर:- जीवद्रव्य (Protoplasm)-हक्सले (Huxley) ने बताया कि जीवद्रव्य जीवन का भौतिक आधार' (Physical Basis Of Life) है। सन् 1940 में परकिंजे ने सर्वप्रथम 'प्रोटोप्लाज्म' (Protoplasm) शब्द का प्रयोग किया।  रासायनिक दृष्टि से जीवद्रव्य कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थों का एक जटिल मिश्रण है। जीवद्रव्य में जल सबसे अधिक मात्रा में उपस्थित रहता है। जलीय पौधों में 95 प्रतिशत तक जल रहता है। बीज तथा स्पोर में जल 10-15% तक होता है। कार्बोहाइड्रेट जीवद्रव्य का आवश्यक भाग है। 

प्रश्न 14. जीव द्रव्य के कितने भाग होते हैं?

उत्तर:- जीवद्रव्य को दो भागों में बाँटा गया है-1. कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) तथा 2. केन्द्रकद्रव्य (Nucleoplasm)। कोशिकाद्रव्य केन्द्रक एवं कोशिका झिल्ली के बीच का जीवद्रव्य होता है, जबकि केन्द्रकद्रव्य केन्द्र के अंदर का जीवद्रव्य होता है।

प्रश्न 15. केन्द्रक क्या है इसके कार्य लिखिए?

उत्तर:- केन्द्रक कोशिका का मुख्य भाग होता है। इसमें डी. एन. ए. (D.N.A. = Deoxyribo Nucleic Acid) तथा आर. एन. ए. (R.N.A. = Ribo Nucleic Acid) और गुणसूत्र (Chromosome) पाये जाते हैं। इसलिए इसका आनुवंशिकी में महत्वपूर्ण स्थान है।

केन्द्रक अंडाकार, गोलाकार, चपटे आदि विभिन्न आकृति के होते हैं। कुछ कीटों एवं लाल रुधिरकणिकाओं में यह अनियमित आकार का होता है । केन्द्रक का आकार कोशिका के प्रकार एवं केन्द्रक के कार्य पर निर्भर करता है। केन्द्रक में निम्नलिखित चार भाग होते हैं :

प्रश्न 16. केन्द्रक कला क्या है इसके कार्य लिखिए?

उत्तर:- केन्द्रक कला (Nuclear Membrane) इसकी खोज ओ. हटविंग द्वारा की गई। केन्द्रक के चारों ओर एक महीन कला होती है, जिसे केन्द्रक कला' कहते हैं। यह दो परतों या झिल्लियों की बनी होती है। प्रत्येक झिल्ली एक यूनिट मेम्ब्रेन को प्रदर्शित करती है और 75A मोटी होती है।

प्रश्न 17. केंद्रक द्रव्य क्या होता है? | केंद्र में कौन सा द्रव्य पाया जाता है?

उत्तर:- केन्द्रकद्रव्य (Nucleoplasm) केन्द्रक कला के अंदर केन्द्रक में एक पारदर्शी अर्द्ध-तरल एवं कणिकीय मैट्रिक्स होता है, जिसे केन्द्रकद्रव्य या केन्द्रक रस (Nuclear Sap) कहते हैं। इसमें RNA, DNA, प्रोटीन, एंजाइम, खनिज लवण आदि पाए जाते हैं।

प्रश्न 18. केंद्रिका क्या है? | केन्द्रक किसकी बनी होती है?

उत्तर:- केन्द्रिका (Nucleolus) इसकी खोज फॉण्टेना (Fontana) ने की थी। यह एक छोटी एवं गोल रचना के रूप में पायी जाती है, कभी-कभी एक केन्द्रक मदो या दो से अधिक केन्द्रिकाएँ होती हैं। यह मुख्यतः RNA एवं फॉस्फोलिपिड्स का बना होता है। इसके चारों ओर केन्द्रक कला का अभाव होता है।

प्रश्न 19. क्रोमेटिन क्या है? | क्रोमेटिन कहाँ पाई जाती है?

उत्तर:- क्रोमैटिन (Chromatin) यह केन्द्रक का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग है। यह धागे के रूप में एक दूसरे के ऊपर फैलकर एक जाल-सा बनाता है। इसे क्रामाटन रेटिकुलम (Chromatin Reticulum) कहते हैं। कोशिका-विभाजन के समय ये धागे सिकुड़कर छोटे एवं मोटे हो जाते हैं। अब इन्हें गुणसूत्र (Chromosomes) कहते हैं।

प्रश्न 20. माइटोकॉन्ड्रिया क्या है और इसका कार्य क्या है?

उत्तर:- माइटोकॉण्ड्रिया कोशिकाद्रव्य में पाई जाने वाली गोलाकार या सूत्राकार रचनाएँ होती हैं। इनकी औसत लंबाई 3-5 Mμ तथा औसत व्यास 0.2 से 2mμ तक होता है [1μ = 10-6m=१०-Μm] | इसमें बहुत-से श्वसनीय एजाइम रहते हैं, जिनकी सहायता से इलेक्ट्रॉन के ट्रान्सफर के द्वारा ATP बनते हैं, 

जिनमें ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा के आन्तरिक झिल्ली रूप में संचित रहती है। यह ऑक्सी-श्वसन से भी सम्बंधित होता है तथा एडीनोसिन ट्राइफॉस्फेट (ATP) के अणुओं के रूप में ऊर्जा का उत्पादन करता है, अतः ऊर्जा उत्पन्न करने के कारण इसे ऊर्जा का बिजलीघर अथवा कोशिका का ऊर्जाघर कहा जाता है।

प्रश्न 21. लवक किसे कहते हैं और कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर:- लवक मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं:-
  1. अवर्णीलवक (Leucoplast), 
  2. वर्णीलवक (Chromoplast) 
  3. हरितलवक (Chloroplast)

प्रश्न 23. अवर्णी लवक किसे कहते हैं?

उत्तर:- अवर्णीलवक (Leucoplast) ये रंगहीन तथा अनियमित आकार के होते हैं। इसमें कोई वर्णक नहीं होता है। ये पौधों की जड़ों में एवं भूमिगत तनों में पाये जाते हैं। इनमें खाद्य-पदार्थ संग्रहीत रहते हैं।

प्रश्न 24. वर्णीलवक किसे कहते हैं?

उत्तर:- वर्णीलवक (Chromoplast):-इसमें रंगीन वर्णकद्रव्य होता है। ये नीले, | लाल एवं नारंगी रगों के लवक हैं। इन वर्णकों के आपसी मिश्रण से क्रोमोप्लास्ट और भी रंग बनाते हैं। ये पुष्प के दलों तथा फलों के छिलकों में अधिक मात्रा में मिलते हैं। लल नारंगी रंग के वर्णक कैरोटीन, पीले रंग के वर्णक जैन्थोफिल आदि में होते हैं।

प्रश्न 25. हरितलवक किसे कहते हैं?

उत्तर:- हरितलवक (Chloroplast):-हरितलवक हरे रंग के लवक हैं, जिनमें हरे रंग का पर्णहरित या क्लोरोफिल (Chlorophyll) उपस्थित रहता है, जिसके कारण पौधे के कुछ भाग एवं पत्तियाँ हरी दिखाई देती हैं। 

क्लोरोफिल के द्वारा ही प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया होती है। अतः हरितलवक प्रकाशसंश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण करता है, इसलिए इसे पादपकोशिका की रसोईघर (Kitchen) भी कहते हैं।

प्रश्न 26. गॉल्जीकाय क्या होते हैं?

उत्तर:- गॉल्जीकाय (Golgibody)-इसका पता 1898 ई. में गॉल्जी ने लगाया था, इसलिए इसे गॉल्जीकाय (गॉल्जीबॉडी) कहते हैं। इसे डिक्टियोसोम (Dictyosome) भी कहते हैं। इसका मुख्य कार्य कोशिकाभित्ति और Cell Plate का निर्माण करना है। इसमें वसा तथा प्रोटीन अधिक मात्रा में पाये जाते हैं।

प्रश्न 27. गॉल्जीकाय की खोज कब हुई?

उत्तर:-गॉल्जीकाय (Golgibody)-इसका पता 1898 ई. में गॉल्जी ने लगाया था, इसलिए इसे गॉल्जीकाय (गॉल्जीबॉडी) कहते हैं। इसे डिक्टियोसोम (Dictyosome) भी कहते हैं। इसका मुख्य कार्य कोशिकाभित्ति और Cell Plate का निर्माण करना है। इसमें वसा तथा प्रोटीन अधिक मात्रा में पाये जाते हैं।

प्रश्न 28. अर्द्ध पारगम्य झिल्ली क्या है?

उत्तर:- यह एक परत है जो केवल विलायक कणों को गुजरने की अनुमति देती है लेकिन विलेय कणों या अणुओं को इससे गुजरने की अनुमति नहीं देती है।

अर्थात्, एक अर्ध-पारगम्य झिल्ली एक प्रकार की जैविक या कृत्रिम झिल्ली या परत होती है जो केवल कुछ प्रकार के अणुओं, आयनों या कणों को ही अपने से होकर गुजरने देती है और रुक जाती है या अन्य कणों को गुजरने नहीं देती है।

यह एक सतत चादर की तरह होता है, अर्धपारगम्य झिल्ली में विशेष छिद्र होते हैं जो केवल कुछ कणों या अणुओं को ही अपने से होकर गुजरने देते हैं और जो कण इन छिद्रों के अनुरूप नहीं होते हैं वे अर्धपारगम्य झिल्ली से नहीं गुजरते हैं। इस झिल्ली से केवल विलायक के कण ही ​​आसानी से गुजर सकते हैं लेकिन विलेय के कण इससे होकर नहीं गुजर सकते।

जैसा कि हमने ऊपर पढ़ा एक अर्धपारगम्य झिल्ली किसी भी प्रकार की हो सकती है, जैविक या प्राकृतिक, जैविक झिल्ली वह है जो स्वाभाविक रूप से जीवित प्राणियों में पाई जाती है जैसे हमारे शरीर में पाई जाने वाली कई प्रकार की झिल्ली जैसे रक्त शोधन प्रणाली। 

साथ ही रक्त के लिए एक विशेष प्रकार की झिल्ली पाई जाती है जो रक्त के शुद्ध कणों को ही गुजरने देती है लेकिन अन्य कणों को गुजरने से रोकती है जिससे रक्त शुद्ध हो जाता है।

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